Prakash thakur

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Tuesday, 13 September 2011

gonu jha - guru ka aasirbad


गोनू झा नित्य पाठशाला तं जाइत छलाह मुदा पाठ कहियो याद नहि करैत छलाह | गुरु जी हुनका डाँट - दबाड़ करैत छलथिन मुदा ओ तकर कनिको फिकिर नहि करैत छलाह |

एक दिन गुरूजी सभ विद्यार्थीसँ पाठ सुनि रहल छलाह | सभ गोटे अपन - अपन पाठ सुना देलनि, मुदा गोनू झाक बेर अयलनि तं ओ कहलथिन - गुरूजी आइ नै काल्हि सूना देब |

गुरूजी बजलाह - " अच्छा, जँ काल्हि नहि सुनयबी तs पीठक खाल खीचि लेबह | "

छुट्टी भेल | सभ विद्यार्थी अपन - अपन घर चलि पड़लाह |

दोसर दिन सभ विद्यार्थी पाठशाला पहुँचला | गोनू झा सभसँ आगू अपन जगह पर डटल छलाह |

कनेक कालक बाद गुरूजी कक्षामे अयलाह | ओ गोनू झासँ - " की गोनू, पाठ याद कयलौं ने ? "

- " हँ गुरूजी | '

- " तs सुनाउ! "

- " आइ नै, काल्हि गुरूजी! "

- " से कियक? "

- " अहाँ आइ नै, काल्हि सुनयबाक लेल कहने रही! "

गोनू झाक बुधियारी गुरूजी बुझि गेलाह, ओ कहलनि - " गोनू, हम अहाँकेँ चीन्हि गेलौं अछि | हम अहाँक खाल घीचि लेब !

- " गुरूजी ! हम वर्ख दिनसँ पाठशाला आबि रहल छी | हम गोनू छी | आ से अपने अखन धरि चिन्हने नै रही? "

- " हम आहाँ केँ नीक जकाँ चीन्हि गेल छी | अहाँ एक नम्बरक फनटूस लड़का छी | हम आइ फेर कहि दैत छी जे काल्हि अर्थात वृहस्पतिकेँ सम्पूर्ण पोथी समाप्त कs नै अनलौं, तs बुझि लिअs जे अहाँक कुशल नहि अछि |


- ' जे आज्ञा गुरूजी | " गोनू नहुएसँ बजलाह |

वृहस्पतिकेँ गोनूझा समय पर पाठशाला पहुँचलाह | अबितहि ओ गुरूजीसँ कहलनि - " गुरूजी, हम पोथीकेँ समाप्त कs देल अछि | "

- " लाउ पोथी ! एखने हम पुछै छी | "

- " हम तs ओकरा काल्हि सांझहिमे समाप्त कs देलहु, आब कतs सँ दिअ?

- " हम कहै छी, पोथी लाउ ! "

- " अहाँ नै बुझलियै गुरूजी, हम अहाँक आज्ञानुसार काल्हि जाइते पोथीकेँ फाड़ी समाप्त कs देल | "

- " रे गोनुआ! हम कहि दै छिऔ, काल्हि नव पोथी कीनि कs पाठ नै सुनयलें तs तोहर प्राण लs लेबौ | "

- " अबस्स लs लेब गुरूजी! मुदा ई तs बुझा दिअ जे प्राणक की रूप अछि? "

- " प्राणक कोनो रूप नहि होइछ गोनू | ई प्रत्येक शरीरमे हवाक रूपमे वर्तमान रहैत अछि!

- " तखन तs हम एखनो बुझा दैत छी | "

- " की? "

- " यैह जे नव पौथीक लेक माय हमरा पाइ नहि देतीह तेँ हमार शारीरसँ प्राण लs लिअ एखने प्राण दs रहल छी | " आ ई कहैत गोनू झा मुँहसँ हवा छोड़य लगलाह |

गुरूजीकेँ हँसी लागि गेलनि, ओ कहलथिन - " गोनू, तोरा विद्या नहि लिखल छह | परंच बुधयारीमे तोरा क्यो पछाड़ी नहि सकैत छथुन | ई आशीर्वाद छह | "

गोनू झा माथ झुका ई आशीर्वाद ग्रहण कयलनि |
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Maithili kahanin - pita ka aasirbad

गोनू झाक पिताकेँ ज्योतिषी लोकनिसँ हाथ देखेबाक बड़ सौख रहनि | दूर दूरसँ हस्तरेखा देखनिहार आबथि आ हुनका बूडि बना पाइ ऐंठी, विदा भs जाइत छलाह |

एक दिन गोनू झाकेँ किछु पैसाक आवश्यकता छलनि | ओ अपन पितासँ छलनि | ओ अपन पितासँ पाइ मँगलनि मुदा पिता पाइ देब अस्वीकार कs देलथिन | तखन गोनू झा हुनक दुर्वलतासँ लाभ उठ्यबाक व्योंत लगओलनि | आ एकटा नाटक मंडलीमे गेलाह | ओतsसँ गेरुआ वस्त्र, जटा आ एकटा कमण्डल भाड़ा पर लs अनलनि | पशचात ओ गेरुआ वस्त्र पहिरलनि, माथ पर जटा जगओलनि, देहमे विभूति लेपलनि तथा हाथमे कमण्डल धारण कs अपन घरक मुहँथरि पर पहुँचि गेलाह | महात्मा बुझि गोनू झाक पिता हुनका बड़ आदरसँ बैसओलनि आ पुछ्लनि - " महाराज, कतs आगमन भेलैक अछि? "

महात्माजी मुहँ पर आंगुर राखि स्वयंकेँ यौनी बाबा कहलनि आ इशारासँ बुझओलानी जे हम सिलेट - पाटी पर लिखिकs गप्प करब |

गोनू झाक पिता महात्माजीकेँ नीक - निकुत भोजन करओलनि | तदुपरांत अपन भाग्यक मादे जिज्ञासा कयलनि |

महात्माजी गोनुझाक पिताक - आगू - पाछंक सम्पूर्ण खेढ़ा कहि देलथिन | ओ ई सुनि गद् - गद् भs गेलाह तथा महात्माजीकेँ दक्षिणास्वरुप बहुत रास धन एवं एकटा औंठी प्रदान कयलनि |

एम्हर महात्माजीक भविष्यवाणी पर सम्पूर्ण गाममे हल्ला मचि गेल | सभ अपन - अपन भाग्य पुछबाक लेल हुनका लsग आबs लागल |

महात्माजी सभक वखान करैत धन बटोरय लगलाह | किछुए दिनमे बहुत रासधन एकट्ठा भs गेलनि आ ओ ओतsसँ डेरा तोड़लनि | गामसँ बहरा ओ अपन हुलिया बदललनि आ अपन वास्तबिक भेषमे आबि गेलाह | महात्माक भेषके नाटक - मंडलीकेँ सुपुर्द कs किछु दिन भरि एम्हर - ओम्हर मटरगस्ती करैत रहलाह |

एक दिन सहसा ओ घर घुरलाह | पिताकेँ हजारो टका आ एकटा औंठी देलनि |

अपन औंठी देखि गोनू झाक पिताकेँ बड़ अचरज भेलनि, ओ पुछलथिन - " अयँ हओ, ई औंठी कतs भेटलह | '

गोनू झा सम्पूर्ण रहस्य फोलि देलथिन | आब हुनकर पिताकेँ नहि रहल गेलनि, ओ कहलथिन - " गोनू, तों तs बापोकेँ नै छोड़लह! | "

- " बाबू, अपने घरमे पहिने बुद्धिक परीक्षा लेबाक चाही आ तखन बाहरक लोक पर हाथ साफ़ करबाक चाही | अहाँ हमरा आशीर्वाद दियs जे हम ऐ विद्या प्रसादे सफल होइत रही | "

- " बेटा संतानकेँ सदा पिताक आशीर्वाद रहैत छैक | तों ऐ पेशामे माहिर बनs तथा तोहर ख्याति दिन दुन्ना - राति चौगुन्ना पसरैत चलि जाओ |

गोनू झा माथ नबाकs पिताक आशीर्वाद ग्रहण कयलनि |
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Maithili kahani - gonu jha ka kali ka aasirbad

मिथिलामे माँ काली शक्तिक अवतार मानल जाइत छथि | गोनू झा हुनकहि उपासक छलाह | हुनक उपासना कयलाक बादहि ओ कोनो आन काज करैत छलाह | तेँ हुनका प्रत्येक काजमे सफलता भेटैत छलनि |

एक दिन गोनू झा निशचय कयलनि जे, जेना हो, माँ कालीक दर्शन कायल जाय | एहि लेल ओ निरन्तर हुनक आराधना करय लगलाह | काली प्रसन्न भेलथिन आ निशचय कयलनि जे साक्षात् दर्शन देबासँ पूर्व गोनू झाक साहसक परीक्षा लेल जाय |

एक राति गोनू झा सूतल रहथि | निसभेर रातिमे माँ कालीक दर्शन देलथिन | हुनकर रूप विकराल छल | एक सय मुहँ रहनि मुदा हाथ दुइये टा | गोनू बाबू हुनकर ई रूप देखि कनिको विचलित नहि भेलाह | ओ पहिने तs हुनका प्रणाम कयलनि मुदा गोनू ठठाकs हँसि पड़लाह |

माँ कालीककेँ विशवाश रहनि जे हुनकर ई भयंकर रूप देखि गोनू झा विचलित भs उठताह, मुदा हुनका हँसैत देखि पुछलथिन - " की, हमर ई रूप देखि अहाँकेँ डर नै भेल? "

गोनू झा कहलथिन - माँ बाघसँ डर होइत छैक मुदा ओकर बच्चा ओकरासँ कनेको नहि डराइत अछि, अपितु ओकरा देह पर कदैत - फनैत रहैत अछि | तखन अहीं कहू जे अहाँ सँ अहाँक नेनाकेँ डर लगतै? "

माँ काली कहलथिन - " गोनू अहाँक मन्तव्य एकदम सत्य अछि | मुदा ई तs कहू जे हमरा देखि अहाँकेँ हँसि कियक लागि गेल? "

गोनू झाक उत्तर भेलनि - " हे माँ हमरा मात्र एक मुहँ आ एक नाक अछि, मुदा दु टा हाथ रहितो सर्दी भेला पर नाक पोछैत - पोछैत फिरीसान रहैत छी " |

- " अहाँ कहs की चाहैत छी ? "

- " अहाँकेँ एक सय मूँह आ एक सय नाक अछि, मुदा हाथ दुइये टा | हमरा चिन्ता भs गेल जे सर्दी भेला पर अहाँ अपन नाक सभ कोना पोछैत होयब | आ यैह कल्पना करैत हमरा हँसी लागि गेल " |
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Maithili kahani - aakta chhala gonu jha


हमरा गोनू झाक मादे किछु नहि कहबाक अछि | गोनू झा स्वयं एक टा चरित्र छथि जे अपने खिस्सामे बहुत किछु कहि जाइत छति |

गोनू झा कोनो खिस्सा नहि लिखलनि | हुनकर सम्पूर्ण जीवने एहन-एहन विशेषतासं भरल - पुरल छल जे ओ खिस्सा बनि गेल | आ जे खिस्सा एखन मिथिलाक गाम - गाममे बूढ - पुरनियांसं सुनल जा सकैछ, प्रसंगवश कोनो उदहारणमें प्रयोग होइत देखल जा सकैछ |

अपन देशमें एहि चरित्रसं मिलैत - जुलैत बहुतो चरित्रक खिस्सा प्रचलित अछि. जाहिमे प्रचलित अछि बीरबल, तेनालीराम, गोपाल भीड़, देवन मिसर, आदि | मुदा गोनू झा एहि सभसँ भिन्न छथि | हिनक खिस्सामें अलगटटे चिन्हल जा सकैछ, कारण एहि खिस्सा सभक ह्रदय रहैत छैक धुर्तई | आ तें गोनू झाकें ' धूर्त - शिरोमणि ' क विशेषणसं अभिहित कयल जाइत अछि | गोनू झा वीरबल, तेनालीराम, गोपाल भांड, अथवा अन्य अन्य परिचित चरित्रसं भिन्न रहने एखनो जीवित छथि |

गोनू झाक ई चरित्र - कथा कतहु लिपिदिध नहि अछि | एही कथा सभकें मिथिलामें कहबाक परम्परा रहल अछि | आ जे नाटकक एक उपांग ' एकालाप ' सदृश होइछ | कथा कहबा काल कथावाचक किछु बात तं शब्दशः कहैछ मुदा बहुत रास बात ओकर भाव - भंगिमा द्वारा अभिव्यक्त होइछ | आ सैह भावः - भंगिमा गोनू झाक चरित्र - कथाक चमत्कार अछि | अर्थात् जखन कथामे निहित धुर्तई आ कथा वाचकक भावः - भंगिमा संगमे होइछ तखने गोनू झाक असली कथाक सागर लहरा उठैछ |
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lekh - khattar kaka

मोबाइल आ इन्टरनेट ई दुनियाँ मे जे परिवर्तन आनने हो से दोसर गप्प, मुदा हम दाबी सँ कहि सकैत छी जे हमर घर मे क्रान्ति जरूर आएल अछि. आब अहाँ लोकनिक काकी’क चुल्हा-चिनवार बिल्कूल “ग्लोबल” भ’ गेल अछि. ओ पूरे दुनियाँ’क सम्पर्क मे रहैत छथि आ नहि जानि केहेन केहेन प्रश्न पुछैत रहैत छथि. पहिने तऽ बात केवल केवल प्रश्ने टा तक सीमित छल मुदा आब बात ओहि सँ आगू निकलि गेल. पुरे दुनियाँ के छकाबे वाला अहाँक खट्टर काका आब काकी सँ हारि मानैत छथि. आब हम बुझए लागलहुँ जे भाँग हम खाइत छी आ ओ किएक बोतलाएल रहैत छथि?
आई भोरे भोर चाह पीबाक काल काल मे हमरा पुछए लागलीह, “अहाँ ओसामा बिन लादेन’क बारे मे की जानैत छी?”
हम कहलिअन्हि, “ओसामा के बारे मे कोनो बात आब नुकाएल अछि की?”
हुनकर जवाब छलन्हि, “ओ अरब जगत के दोसर खट्टर काका छलैथ।”
हमरा नहि बुझल छल जे हमर प्रतिद्वन्द्वी अफगानिस्तान के कबायली इलाका मे रहैत अछि. खट्टर काका आ ओसामा बिन लादेन मे समानता ताकब सबहक मजाल नहि. मुदा जखन कल्पना अपन चरम सीमा केँ पार कऽ जैत छैक तऽ ओहि ठाम सँ कल्पना कयनिहार’क बतहपन शुरु होइत छैक. अहाँक काकी’क हऽद जानबाक लेल हम हुनका खोदनाय शुरु केलहुँ.




बूढ़’क अर्थशास्त्र’क पछुलका अँक मे पढ़लहुँ जे दू टा सरदार (मनमोहन सिँह आ अहुलवालिया) मिलि अर्थशास्त्र मे घोर गलती केने जा रहल छथि. बढैत जनसँख्या, अन्ग्रेजी बाजबाक योग्यता आ कम्प्युटर’क सामान्य जानकारी पर भारत केँ सुपर पावर बनेबाक योजना बना रहल अछि. मुदा ई दुनू टा सरदार बिसरि गेल छथि जे एखुनका ६५% यूवा जनसँख्या तीस साल बाद बुढ़ा जायत. तखन नहि तऽ आर्थिक प्रगतिए रहत आ नहि सुपर पावर बनबाक कोनो लालसा. चारु दिस बुढे-बुढ आ बुढ़ सँ जुड़ल अर्थशास्त्र.



हम हुनकर पहिल प्रश्न’क जवाब दैत कहलिअन्हि, “ओसामा बिन लादेन मात्र एकटा आतँकवादी छल आ हुनकर गति ओहने भेलनि जेना कोनो सामान्य आतँकवादी’क होएत छन्हि. आतँक’क एतेक बड़का साम्राज्य कोनो काज नहि एलनि. अमेरिका हुनकर घर मे जा केँ मारि देलकनि आ किनको कानो कान खबरो नहि भेलनि”।



“तऽ अहुँ वैह बुझैत छी जे बाँकी दुनियाँ बुझैत छैक”, अहाँ लोकनिक काकी अपन इन्टरनेट सँ ताकल जानकारी पर कनफ़िडेन्ट छलीह आ हम ई पहिने भाँपि गेल छलहुँ।
तेँ हुनकर जानकारी केँ हम चुनौती दैत कहलिअन्हि, “इन्टरनेट सँ ताकल जानकारी ओतेक विश्वसनीय नहि होएत छैक. पूरे दुनियाँ के बुझल अछि जे ओसामा की छल।”




“हम कहलहुँ ने, ओसामा अरब जगत के दोसर खट्टर काका छलाह” ओ फेर सँ वैह दोहराबैत कहलीह.
हम कहलिअन्हि, “ हँ हमरा बुझल अछि ओ हमरे सन हेहर छथि, वैह जिद्द, वैह arrogance, ओतबी बहस कयनिहार, मुदा एहि सँ किओ खट्टर काका नहि बनि जैत छैक”।
“ओसामा एकटा कोर्पोरेट जगत के सी.ई.ओ छलाह” सोझे सोझ अपन मुद्दा पर आबैत अहाँ’क काकी हमरा कहलैथ.
“कोन कार्पोरेशन के ओ सी.ई.ओ छल यै” हम पुछलिअनि।
“आतँकवाद अपने आप मे एकटा कार्पोरेशन छैक. एतय वैह नियम सब लागू होएत छैक जे दोसर बहुराष्ट्रीय कम्पनी मे लागू होएत छैक. कोनो भी बहुराष्ट्रीय कम्पनी सन दुनियाँ के प्रत्येक कोन मे आतँकवाद’क आफ़िस होएत छैक. ओहिना रीक्रुटमेन्ट होएत छैक. नफ़ा-नुकसान ओहिना होएत छैक. कम्पनी’क क्वाटरली रिजल्ट ओहिना घोषित काएल जैत छैक. किछु विशेष तरह’क जनता’क ओहि मे इन्वेस्टमेन्ट रहैत छैक आ एहि कम्पनी’क पर्फ़ोरमेन्स’क आधार पर आतँकवादी रुपी कम्पनी’क शेयर’क मूल्य घटैत बढैत रहैत छैक आ ओहिना आतँकवाद’क पैसा बी.एस.ई. आ डाउ जोन्स मे लागल रहैत छैक.”
एक सँग एतेक बात हमरा बुझि मे नहि आएल. हम कहलिअनि, “अहाँक एतेक बात हमरा अपच लागि रहल अछि”
ओ तपाक सँ उत्तर देलैथ, “साधारण बात अछि. आई काल्हुक नवयुवक जखन कोनो कम्पनी मे भर्ती होएत छैक तऽ की देखैत छथि. कम्पनीक की पर्फ़ोरमेन्स छै? यदि तीन साल काज काएल जाए तऽ प्रोफ़ाइल मे की बढ़ोतरी हेतैक, दरमाहा कतेक भेटतैक आ पर्क कतेक भेटतैक”
हम चुप छलहुँ आ ओ अपन तरँग मे छलीह, “ओसामा के कोरपेरेट मे भर्ती होबए सँ पहिने अफगानी, पाकिस्तानी आकि पस्तुनी यूवक यैह देखैत छथि जे हुनकर कैरियर कतय नीक रहतैक, अलकायदा मे, तालीबान मे, या जैशे मुहम्मद मे. जे अमुक यूवक केँ नीक दरमाहा आ पर्क दैत छैक ओतैये जाइत छैक.”
“आ फेर ओ लोकनि नौकरी कोना चेन्ज करैत छैक” हम चुटकी लैत पुछलिअनि.
हमर चुटकी पर ओ एना प्रतिक्रिया देलथिन जे मानू हमरा हुनकर बात बुझबाक योग्यते नहि अछि.
मुदा जवाब तऽ हुनका देनाइए छलनि, ओ कहय लागलीह, “कम्पनी मे जेना लोक नौकरी चेन्ज करैत छैक, ओसामा के लड़ाका तहिना नौकरी चेन्ज करैत छैक. जे बेसी दरमाहा देत ओतय चलि जायत. दोसर बात कम्पनी’क ब्रैन्ड मूल्य ओहि मे बहुत महत्वपूर्ण स्थान राखैत छैक. अतः यदि कोनो यूवक जैशे-मोहम्मद छोड़ि कम पैसा मे अलकायदा ज्वाइन कऽ लैथ तऽ कोनो अनर्गल नहि. ओना प्रत्येक कम्पनीक भाँति आतँकवादी सँगठन सेहो चाहैत छैक जे हुनकर कम्पनी मे सबसँ बेसी प्रतिभाशाली यूवक होबए जाहि सँ सँगठन दिन दूना आ राति चौगूना बढ़ए”.
आब हुनकर बात किछु तर्कसँगत लागि रहल छल, हम कहलिअन्हि, “से तऽ ठीक छै, मुदा ई बताउ जे प्रत्येक कार्पोरेशन के लक्ष्य होइत छै जे बेसी सँ बेसी पैसा कमाएल जाए. ओसामा के लक्ष्य तऽ एहेन नहि छल.”
“से अहाँ के के कहलक. आतँकवादी सँगठनक लक्ष्य मात्र पैसा होएत छैक. पैसा’क अलावा आओर किछु नहि” अहाँक काकी जोर दैत कहलथिन्ह.
हम हुनकर गप्प सँ सँतुष्ट नहि छलहुँ. “पैसा तऽ दोसरो तरीका सँ कमाएल जा सकैत छैक, एहेन रास्ता ओ लोकनि किएक चुनए छै”
हमरा तुरन्ते उत्तर भेट गेल, “आओर नहि तऽ की? अफ़गानिस्तान के आठवाँ पास नवयूवक केँ सोफ़्टवेयर कम्पनी मे नौकरी भेटतैक.”
“आ ओ जेहाद फेहाद...” हम पुछलिअनि.
“मात्र एकटा देखाबा. पैसा कमेनाई मुख्ये टा नहि अपितु मात्र एकेटा लक्ष्य. जे आतँकवादी सँगठन जतेक बड़का घटना के अँजाम दैत छैक ओकर मारकेट वैल्यू ओतबी बढ़ैत छैक. इहो एकटा सर्विस इन्डस्ट्री थीक जतय आदमी के मूल्य कोनो आओर चीज सँ बेसी होएत छैक”, काकी अपन जवाब सँ हाजिर छलीह.
आब हमरा लागय लागल छल जे काकी’क बात मे किछु दम जरुर छैक. हम कहलिअनि, “जँ अहाँक बात सत्य थीक, तऽ लागले हाथ इहो बता दिअ, जे आब आतँकवादी सँगठन के की हेतैक. ओसामा बिन लादेन तऽ मरि गेलैक.”
हम देखलहुँ जे काकी’क मुँह मे बुरलेल शब्द आबैत आबैत रुकि गेलनि. पत्नीधर्म इन्टरनेट सँ जोगाएल जानकारी पर बेसी भारी पड़ि रहल छलनि. ओ शालीनता सँ उत्तर देलथिन, “ओसामाक मरने किछु नहि होएत. जेना कोनो पैघ कम्पनी’क सी.ई.ओ. “रिटायर हर्ट” भऽ गेलाह. कम्पनी’क परफोर्मेन्स किछु दिन’क लेल डाँवाडोल रहत. फेर सँ वैह. कोनो दोसर लोक एहि पद केँ ग्रहण करताह आ कम्पनी केँ उपर लऽ जेबाक लेल प्रयत्न करताह”.
मोन होएत छल जे इन्टरनेट हमर जवानी मे किएक नहि आएल. अहाँ लोकनिक काकी’क बुद्धि चालीस साल पहिने खुजि जाइते. काकी’क सँ हम हारि मानि गेल छलहुँ आ हुनकर तर्क पर हम स्तब्ध भऽ चुपचाप बैसल छलहुँ. स्त्रीगण अपन पति केँ हारि मानैत नहि देखि सकैत छथि. हमरा सान्त्वना दैत कहलैथ, “ओसामा’क मरला’क बाद एखन आतँकवाद रुपी कार्पोरेट मे मन्दी अछि.”
काकी उपसँहार मे एकटा छोट सन लेक्चर दऽ देलीह, “आतँकवाद एकटा सर्विस इन्डस्ट्री थीक जाहि मे मुख्य उद्देश्य अछि पैसा लऽ केँ दोसरा लेल किछु काज करब थीक. एहि मे आउटसोर्सिँग सेहो होएत छैक. अमेरिका अरब जगत मे कब्जा केवल तेल’क पोलिटिक्स लेल केने छल. आ अरब जगत’क व्यापारी ओसामा सन लोक केँ फण्डिँग कऽ तेल’क सत्ता अपने हाथ मे राखए चाहैत छथि. ई सब पैसाक लेल खीचातानी होइत अछि. आ तथाकथित आतँकवादी एकटा स्किल्ड सोफ्टवेयर वर्कर सँ बढ़ि के किछु नहि”.
जखन हुनकर लेक्चर खत्म भेल तऽ हम जोर सँ श्वाँस छोड़लहुँ. ओसामा मरि चुकल छल. अहाँक काकी एहि स्थिति केँ आतँक’क मन्दी कहि रहल छलीह. आ एतय किछु दिन सँ हम अखबार मे पढ़ि रहल छलहुँ. भारत मे एकटा फेर सँ रीसेशन आबि रहल छल. काकी मँदी पर अपन वक्तव्य दऽ रहल छलीह. डर भेल कहीँ रिसेशन पर जँ हुनकर बहस शुरु भऽ जान्हि तऽ हुनका रोकब कठिन.
हलाँकि दू टा प्रश्न एखनहुँ मस्तिष्क मे बिर्र्रोह उठेने छल—जे खट्टर काका आ ओसामा बिन लादेन मे समानता की? आ दोसर जे आतँकवादक रिसेशन मे जन सामान्य पर की असर होएत छैक. अपने लोकनिक काकी अपन उफ़ान पर छलीह. हम चुप्पे रहबा मे अपन फायदा देखलहुँ. बाद मे अवसर भेटला पर एहि दू टा विषय केँ फेर सँ खोदब.
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Sunday, 4 September 2011

Maithili kahani - gonu jha ka bilar


गोनू झाक बुद्धिमत्ताक लोहा सभ कियो मानैत छल । अपन बुद्धिमत्तेक बल पर ओ मिथिलाक राजदरवार मे आदर पबैत छलाह । एक बेर मिथिला नरेशक मोन मे एकटा विचार आयल । ओ अपन सभ दरबारी के बजौलनि आ एक-एकटा विलाड़ि सभ कें दैत आदेश देलैन जे एहि बिलाड़ि के तीन महीन धरि पालू-पोषू आ तत्पश्चात्‌ जकर बिलाड़ि अधिक बलिष्ठ रहत, हुनका इनाम भेटत । नरेशक आदेश रहनि । सभ कियो आदेश मानबाक लेल विवश छलाह । सभ अपन-अपन बिलाड़ि लेलनि आ ओकर खूब पालन करय लगलाह जे कदाचित हमरे इनाम भेटि जायत ।

गोनू सेहो बिलाड़िक संग घर पहुँचलाह । ओहो ओकर सेवा-सुश्रुषा मे लागि गेलाह । घर मे महीस जे दूध दैन से बिलाड़िक भोजन मे चलि जाइक । दू-चारि दिन तँ ठीक लगलनि, परन्तु बाद मे गोनू कें ई बात ठीक नहि लगलनि जे महीस पोसी हम आ दूध पीबय ई बिलाड़ि । ओ एहि युक्ति मे लागि गेलाह जे कोन तरहें दूध बांचि जाय आ इनामो भेटि जाय । अंतत: हुनका एकटा उपाय सुझलनि ।

अगिला दिन भोरे ओ महीस दुहलाह । दूध औंटबेलाह । गरम-गरम दूधक लोहिया ओ आंगन मे रखलाह आ तत्पश्चात्‌ बिलाड़ि के बड़ प्रेम सँ चुचकारलाह । बिलाड़ि दूध देखैत देरी लगीच पहुँचल । गोनू बिलाड़ कें गरदनि सँ पकड़लाह आ गरम दूध मे ओकर मूड़ी डुबा देलनि । बिलाड़ि छटपटायल आ पुन: देह झाड़ि ओतय सँ भागल । आब बिलाड़ि दूध कें देखैत देरी भागि जाय । गोनू निश्चिंत भेलाह आ शान सँ दूध-दही अपने खाय लगलाह । धीरे-धीरे तीन महीनाक अवधि समाप्त भऽ गेल । ओ दिन आबि गेल जहिया मिथिला नरेश बिलाड़िक प्रतिपालनक लेल इनाम बँटताह । सभ कियो अपन-अपन बिलाड़िक संग उपस्थित भेलाह । गोनू सेहो अपन सामान्य बिलाड़ि कें लऽ दर्बार मे हाजिर भेलाह ।

सभक बिलाड़ि एक सँ एक बलिष्ठ रहैक । मिथिला नरेशक लेल निर्णय करब कठिन रहैन । परन्तु गोनूक बिलाड़ि सभ सँ कमजोर रहनि । नरेश गोनू सँ एकर कारण पुछलाह । गोनू बजलाह – महाराज! हमर बिलाड़ि तऽ दूध पीबिते नहि अछि तखन हम की करी? बिलाड़ि दूध नहि पीबैत अछि, एहि गप्प पर सहसा केकरो विश्वास नहि भेलैक । तथापि प्रमाणक लेल एकटा बर्तन मे दूध मँगाओल गेल । दूध के देखितहि गोनूक बिलाड़ि ओतय सँ भागय लागल । सौंसे राज-दरबार देखलक जे गोनूक कहब ठीक छनि । अंतत: मिथिला नरेश बजलाह – बिनु दूध पीने गोनूक बिलाड़ि ठीक छनि तें इनाम गोनू कें भेटबाक चाही । संपूर्ण राजदरबार अचंभित रहि गेल नरेशक निर्णय सँ ।

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Maithili kahani hindi baje ka shauk


एक बेर अरविन्द जी के शुद्ध हिंदी बाज के शौक चढलैन 
वो हमेशा शुद्ध हिंदी में बात करैत सभ सा
एक बेर वो पटना गेला वो बस स्टैंड पर रिक्शा वाला के आवाज देलखिन वो हो शुद्ध हिंदी में -
वो त्रिचक्रयान चालक वो त्रिचक्रयान चालक लेकिन कोनो रिक्शा वाला हिनका जका पढ़ल होई तब ने
कोई अई बे नै कैलई ता ई इशारा सा बजेलैथ एकटा रिक्शा वाला के आ कहलखिन क्या तुम सचिवाल...य चलोगे ???
वो रिक्शा वाला हिनकर बात बुझबे नै केलक वो ता खाली सेक्रटेरिएट बुझाई वो कहलक जे मालिक हमरा नाइ बुझल ऐछ की ई जगह कता छाई से??
अपने हमरा बतायल जाऊ हम आन्हा के ला चालब
आब अरविन्द जी रिक्शा पर बैस गेला आ वोकरा रास्ता बता ब लगला 
रास्ता में कनि उबड़ खाबड़ रहै ता रिक्शा कनि उछैल जाई जय सा अरविन्द जी के दिक्कत मेहसूस होइन
वो खिसिया क वोई रिक्शा वाला क कहलखिन वो त्रिचक्रयान चालक तुम अपने त्रिचक्रयान को शनैः शनैः पदस्थ करो
वोई रिक्शा वाला के बुझेलई जे ई ता हमरा गाईर दैत ऐछ वो कहलक जे मालिक हमरा गाईर किया दाईत छि???
आन्हा चुपचाप बैसल रहू आ खाली रास्ता बताबु नै ता हमहू गाईर देने शुरू क देब
आब अरविन्द जी बुझला जे ई ता हमर बेईज्ज़ती क देत वो चुप भ गेला
आ रिक्शा अपन रास्ता पर चला लागल किछ दूर गेला के बाद वोई रिक्शा वाला के रास्ता के खराबी के कारन बैलेंस बिगैर गेलई आ रिक्शा एकटा बिजली के खम्भा सा टकरा गेलई 
तै पर अरविन्द जी वोई रिक्शा वाला पर खिसिया क कही छथिन वो त्रिचक्रयान चालक तुमने अपने त्रिचक्रयान को बिद्युत के स्तम्भ से सामना करबा कर इस त्रिचक्रयान के एक चक्र को अक्र से वक्र करवा दिया अब में केसे जाऊंगा????? 
वो रिक्शा वाला के फेर बुझेलाई जे ई हमरा गइर दैत छैथ वो कहलकै मालिक हम आन्हा के आखिरी बेर कैह रहल छि जे हमरा गइर नै दिया नै ता बड़ ख़राब हैत आब चलू एकरा पाहिले ठीक कराबी छि तहान आगू ला जेब वो रिक्शा वाला एकटा साइकिल के मिस्त्री के पास लागेल लेकिन रिक्शा वाला के किछ कहा सा पाहिले अरविन्द जी वोई मिस्त्री के कहै छथिन अपना हिंदी में से देखियौ आन्हा सब
हे द्विचक्रयान अभियंता इस त्रिचक्रयान के चालक ने इस त्रिचक्रयान को बिद्युत के स्तम्भ से सामना करवाकर इसके अगले चक्र को अक्र से वक्र कर दिया ह कृप्या इसे सुचक्र कर दे...
वो मिस्त्री बुझलक जे हमरा ता इ गैर द रहल ऐछ आ रिक्शा वाला ता पहिलेहे हिनका कैह देने रही जे आब निक नै हैत जौं आन्हा हमरा आब गैर देब ता 
आब वो दुनु गोटे आव देखलक नै ताव देलक हिनका माईर पीट क दिन में तरेगन सुझाई 
आब बेचारा अरविन्द जी अपन काबिलियत पर कनैत कनैत वापस घर एला.....
आ क़सम खेला जे आब आई के बाद शुद्ध हिंदी नै बाज़ब आ हिनका माथ सा इ शुद्ध हिंदी बाज के भूत उतैर गेलैन
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Maithili kahani khatar kaka



खट्टर कका दलान पर बैसल भाङ्घ घाटैत छलाह । हमरा अबैत देखि बजलाह— हाँ..हाँ…..ओम्ह र मरचाइ रोपल छैक, घूमि कऽ आबह ।
हम कहलिऐन्ह.— खट्टर कका, आइ जयवारी भोज छैक, सैह सूचित करय आयल छी ।
खट्टर कका पुलकित होइत बजलाह…बाह बाह ! तखन सोम�े चलि आबह । दु एकटा धङ्घेबे करतैक त की हैतैक ? …..हँ, भोजमे हैतैक की सभ ?
हम—दही चूडा चीनी ।
... खट्टर कका— बस, बस, बस । सृष्टिगमें सभ सँ उत्कृ ष्टू पदार्थ यैह थीक । गोरसमे सभ सँ माँगलिक वस्तुू— दही, अन्न मे सभक चूडामणि—चूडा, मधुरमे सभक मूल—चीनी । एहि तीनूक सँयोग बूम�ह तै त्रिवेणी—सँगम थीक । हमरा त त्रिलोकक आनन्दभ एहिमे बूमि� पडैत अछि । भूडा…भूलोक, दही…भुवर्लोक, आ चीनी…स्वकर्लोक ।
हम देखल जे खट्टर कका एखन सरँगमे छथि । सभटा अद्भुते बजताह । अतएव काज अछैतो गप्पज सुनबाक लोभें बैसि गेलहुँ ।
खट्टर कका बजलाह— हम त बुम�ै छी जे एही भोजन सँ साँख्यक दर्शनक उत्प त्ति भेल अछि ।
हम चकित होइत पुछलिऐन्हु—ऐं ! दही चूडा चीनी सँ साँख्यच दर्शन ! से कोना ?
खट्टर कका बजलाह…एखन कोनो हडबडी त ने छौह ? तखन बैसि जाह । हमर विश्वाैस अछि कपिल मुनि दही चूडा चीनीक अनुभव पर तीनू गुणक वर्णन कऽ गेल छथि । दही…सत्वकगुण, चूडा…तमोगुण, चीनी…रजोगुण ।
हम कहलिऐन्हद—खट्टर कका, अहाँक त सभटा कथा अद्भुते होइत अछि । ई हम कतह नहि सुनने छलहुँ ।
खट्टर कका बजलाह— हमर कोन बात एहन होइ अछि ने तों आनठाम सुनि सकबह ?
हम— खट्टर कका, त्रिगुणक अर्थ दही चूडा चीनी, से कोना बहार कैलियैक ?
खट्टर कका—देखह, असल त्वि खहिएमे शहैत छैक, तैं एकर नाम सत्व । चीनी गर्दा होइछ, तैं रज । चूडा रुक्षतम होइछ, तैं तम । देखै छह नहि, अपना देशमे एखन धरि “तमहा” चूडा शब्द प्रचलित अछि ।
हम—आश्चतर्य ! एहि दिस हपर ध्या न नहि गेल छल ।
खट्टर कका व्या ख्याल करैत बजलाह—देखह, तमक अर्थ छैक अन्ध।कार । तैं छुच्छ चूडा पात पर रहने आँखिक आगाँ अन्हाेर भऽ जाइ छैक । जखन उज्ज र दही ओहि पर पडि जाइ छैक तखन प्रकाशक उदय होइ छैक । तैं सत्व गुण कें प्रकाशक
कहल गेलैक अछि । “सत्वंा लघु प्रकाशकमिष्ट म्” । तैं दही लघुपाकी तथा सभ कैं इष्टओ (प्रियगर) होइत अछि । चूडा कोष्ठघ कैं बान्हि् दैत छैक । तैं तम कैं अवरोधक कहल गेल छैक । और बिना रजोगुणे त क्रियाक प्रवर्तन हो नहि । तैं चीनीक योग बेत्रेक खाली चूडा दही नहि घोंटा सकैत छैक । आब बुम�लहक ?
हम कहलिऐन्ह — धन्य छी खट्टर कका । अहाँ जे ने सिद्ध कऽ दी !
खट्टर कका बजलाह—देखह, साँख्यषक मत सँ प्रथम विकार हाइ छैक महत् वा बुद्धि । दहि चूडा चीनी खैला उत्तर पेटमें फूलि कय पसरैत छैक । यैह महत् अवस्थाक थिकैक । एहि अवस्थाडमे गप्पख खूब फुरैत छैक । तैं महत् कहू वा बुद्धि…बात एक्केि थिकैक । परन्तुि एकरा हेतु सत्व गुणक आधिक्या होमक चाही अर्थात दही बेशी होमक चाही ।
हम—अहा ! साँख्यन दर्शनक एहन तत्व् दोसर के कहि सकैत अछि ।
खट्टर कका बजलाह—यदि एहिना निमन्त्र ण दैत रहह त क्रमशः सभ दर्शनक तत्व वुम�ा देवौह । त्रिगुणत्मिवका प्रकृति द्रष्टाी पुरुष कैं रिम�बैत छथि । एकर अर्थ जे ई त्रिगुणत्मवक भोजन भोक्ता पुरुष कैं नचवैत तथि । तैं—नृत्यकन्तिि भोजनैर्विप्राः ।
हम कहलिऐन्हत—परन्तु् खट्टर कका ! पछिमाहा सभ त दही चूडा चीनी पर हँसैत छथि ।
खट्टर कका अङपोछा सँ भाँग छनैत बजलाह—हौ, सातु लिट्टी खैनिहार दधि—चिपटान्न क सौरभ की बुम�ताह ! पिह्चजमक जेहन माटि बज्ज र, तेहने अन्नप बजरा, तेहने लोको बज्र सन । अपना देहक भूमि सरस, भोजन सरस, लोको सरस । चूडा पृथ्वी तत्वे…दही जल तत्व ….चीनी अग्निज तत्वन । तैं कफ पित्त वायु—तीनू दोष कैं शमन करबाक सामर्थ्य एहिमे छैक । देखह, अनादि काल सँ दही चूडा चीनीक सेवन करैत—करैत हमरा लोकनिक शोणित ठण्ढाप भऽ गेल अछि । तैं मैथिल जाति कैं आइ धरि कहियो युद्ध करैत देखलहक अछि ?
हम— खट्टर कका, कहाँ सँ कहाँ शह चला देलहुँ । बीच—बीचमें तेहन मार्मिक व्यँ ग्यथ कऽ दैत छिऐक जे………..
खट्टर कका—व्यँ ग्यछ नहि, यथार्थे कहैत छिऔह । देखह, भोजने सँ प्रकृति वनैत छैक । चाली माटि खा कऽ माटि भेल रहैत अछि । साँप बसात पीवि कऽ फनकैत अछि । साहेब सभ डवल रोटी खा कऽ फूलल रहैत अछि । मुर्गा खैनिहार मुर्गा जकाँ लडैत अछि । और हम सभ साग—भाँटा खा कऽ साग—भाँटा भेल छी । हमरा लाकनि भक्त (भात)क प्रेमी थिकहुँ, तैं एक दोसरा सँ विभक्त रहैत छी । ताहु पर की त द्विदल (दालि)क योग भेले ताकय ! तखन एक दल भऽ कऽ कोना रहि सकैत छी ?
हम—अहा ! की अलँकारक छटा !
खट्टर कका—केवल अलँकारे नहि, विज्ञानो छैक । कोनो जातिक स्विभाव बुम�बाक हो त देखी जे ओकर सभ सँ प्रिय भोजन की थिकैक ? देखह, बँगाली ओ पच्छाँ हीक स्वटभावमे की अनतर छैक ?……जैह भेद रसगुल्ला ओ लड्डुमे छैक । रसगुल्ला‍ सरस ओ कोमल होइछ, लड्डू शुष्क. ओ कठोर । रसगुल्लाल पूर्वक प्रतीक थीक, लड्डू पश्चिामक । तैं हम कहैत छिऔह जे ककरो जातीय चरित्र बुम�वाक हो त ओकर प्रधान मधुर देखी ।
हम— खट्टर कका, अपना सभक प्रधान मधुर की थीक ?
खट्टर कका—अपना सभक प्रधान मधुर थीक खाजा । देहातमे पिठाइ कहने ओकरे बोध होइछ । खाजा ने रसगुल्लाम जका
ँ स्निबग्धो होइछ, ने लड्डू जकाँ ठोस । तैं हमरा लोकनिमे ने बँगालीवला स्ने ह अछि, ने पँजाबीवला दृढता ।…….तखन खाजामें प्रत्युक परत फराक—फराक रहैत छैक, से अपनो सभमे रहितहि अछि ।
हम—वाह ! ई त चमत्कािरक गप्प कहल ! मौलिक !
खट्टर कका—ऐंठ वा बासि बात हम बजितहिं ने छी ।
हम—वास्तछवमे खट्टर कका ! अहाँ ठीक कहै छी । गाम—गाममे गोलैसी, घर—घरमें पट्टीदारी म�गडा । कचहरीमे पागे पाग देखाइत अछि । से किऐक ?
खट्टर कका—एकर कारण जे हमरा लोकनि आमिल मरचाइ बेसी खाइत छी । तीख चोख भेले ताकय । तीतोमे कम रुचि नहि । नीम—भाँटा, करैल, पटुआक म�ोर…..। ह्‍ौ, जैह गुण कारणमे हतैक ुैह ने कार्यमे प्रकट हैतैक ! कटुता, अम्ल�ता ओ तिक्ताता हमरा लोकनिक आग बनि गेल अछि । स्वाकइत हम सभ अपनामे एतेक कटाउम� करैत छी !
हम—परन्तुै बँगाली सभमे एतेक प्रेम किऐक ?
खट्टर कका भाँगमे एक आँजुर चीनी मिलबैत बजलाह—ओ सभ प्रत्येाक वस्तु मे मधुरक योग दैत छथि । दालिओ मीठ, तरकारिओ मीठ, माछो मीठ, चटनिओ मीठ ! तखन कोना ने माधुर्य रहतैन्ही ? अपनो जातिमे एहिना मीठक व्युवहार होमऽ लागय तखन ने ! तैं हम कहैत छिऔह जे अपना जातिमे जौं सँगठन करबाक हो त मधुरक बेसी प्रचार करह । केवल सभा कैने की हैतौह ? —“भोज ने भात ने, हरहर गीत !“गाम सँ दुगोला दूर करबाक हो त “दही चूडा चीनी लवण कदली लड्डू बरफी”क भोज करह ।
ई कहि खट्टर कका भाङ्गक लोटा उठौलन्हि और दू—चारि बुँद शिवजीक नाम पर छीटि घट्टघट्ट कय सभटा पीबि गेलाह ।
( हरिमोहन झा , खट्टर ककाक तरँग सँ)

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Story of gonu jha


गोनू झा मृत्युशय्या पर छलाह | प्राण अब-तबमे रहनि | पूरा गाम उनटल रहय महापुरुषक महाप्रयाणक बेलामे | तखने गोनू झाकें कने होस अयलनि, बजलाह – ” भोनू! भोनू!! “
भोनू दौड़लाह हुनकर मुहँ लग – ” की कहे छी भाई? कोनो इच्छा? “
गोनू बजलाह – ” नहि, आब किछु नहि, गोदान करा दैह | “
फेर गोनू थम्हि बजलाह – “हे! एकटा एहन गाय ताकू जे गोदान बाद हमरहि संगे ओकरो प्राण छूटि जाइक | नहि कतौ भेटय तs अपने खुट्टा परक फोलि आनु | जाउ, जल्दी जाउ | आब हमर समय समाप्त भs रहल अछि | “
पूरा वातावरण नोरा गेल | तुरत एक गोटो गाय – फोलि लs अनलक | गोनू बाबू गायक नांगरि धयलनि | मंत्रोच्चारण भेल | आ गोनू – गाय दुनु टगि गेल |
आ गोनू बाबू ऐ पृथ्वी सं विदा भs गेलाह |
एकर बाद गोनू बाबू स्वर्गमें रहथि | हीनकर क्रिया – कर्मक लेखा – जोखा भs रहल छल | चित्रगुप्त महाराज फेरिमे रहथि | एहन लोक आइ धरि नहि देखल | हिनकर कोन क्रिया पुण्य तथा कोन पाप तकरा फडिछायब बड़ दुरुह |
जखन चित्रगुप्त महाराजसं हिनकर समस्या नहि सोझरयलनि तs यमराज स्वयं एहिमे पड़लाह | हुनकर सभ कागज – पत्र देखलनि आ अन्तमें गोनू कें कहलखिन जे आहाँ अपन जीवनमे बस एकटा पुण्य कयलहूँ जे गौ-दान कयल | बाजू आहाँ, आब की करs चाहब |
गोनू कनेक सोचलनि आ फेर कहलखिन हमरा हमर गायकें मंगा देल जाओ |
यमराजक आदेश भेलनि | गाय आनल गेलिओ हुनका सुपुर्द करैत यमराज कहलखिन – “यैह आहाँक सम्पति भेल | एहिसँ आहाँकें गुजर करबाक अछि | ई गाय अहिं टाक बात मानत | बस | “
कहैत यमराज सभा विसर्जित कयलनि | एम्हर गोनू गायक पीठ पीठ सोहरोलनि आ ओकरा कानमे किछु कहलखिन | कि एकाएक स्वर्ग में हरबिररो मचि गेल | गाय यमराज आ चित्रगुप्त दुनुकें चौताड़s लागल | दुनु भगैत जाथि आ ओ दुनुकें हड़पेटने जानि |
एहिना जखन बड़ीकाल चलैत रहल तs यमराज घुरछी कटैत गोनू लग आबि खसि पड़लाह – ” जो हम तोरा सं हारि मानलाहूँ |
” तों स्वर्गमें रहs योग्य नहि छें | ” फेर अपन सेवकें आदेश दैत कहलनि – ‘ गोनू कें पृथ्वी परक मिथिलापुरी खण्ड पठा देल जाय | “
आ गोनू पुनः मिथिला आबि गेलाह ओ एखनो जीवि़त छथि | मरलाह नहि | मरबो नहि करताह |
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पति से ईर्ष्या के चलते पत्नी ने माँगा तलाक


काहिरा के एक होटल में शेफ का काम करने वाले मोहम्मद सैयद के दांपत्य जीवन पर इन दिनों एक अजीब वजह से संकट आया हुआ है. वजह है कि वे खाना बहुत अच्छा बनाते हैं.

हुआ यह कि रमजान के शुरुआत में एक दिन उन्होंने अपने परिवार के लिए खाना खुद बनाने का फैसला किया. उनके हाथ का बना खाना पूरे परिवार को तो बेहद पसंद आया ही, उनके दोनों बच्चे तो उस स्वाद के दीवाने हो गए और मांग करने लगे कि अब से रोज शाम का खाना पिता के हाथों का ही होना चाहिए.

मोहम्मद सैयद की पत्नी को यह बात बहुत नागवार गुजरी. उसने न सिर्फ खुद को बेइज्जत महसूस किया बल्कि उसे अपने पति से ईर्ष्या भी हो गई.

ईर्ष्या का आलम यह है कि उसने मोहम्मद सैयद से तलाक की मांग कर डाली है. हालाँकि अदालत ने रमजान के महीने तक तलाक की कार्यवाही पर रोक लगा दी है. अदालत को आशा है कि महिला का मन बदल जायेगा और वह तलाक पर पुनर्विचार करेगी.

बेचारे मोहम्मद सैयद …. अपना हुनर होटल में ही दिखाते तो बेहतर था … !!!


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आत्मबल- १

फ्रान्सक कथा थिक। रास्ता बगलक पहाड़ीपर बैस एक गोटे अपन जुत्ता मरम्मत करबैत रहथि। एकटा ढेरबा बच्चा जुत्ता मरम्मत करै छल। ओइ बच्चाक बगए-बानिसँ गरीबी झलकैत रहए। मुदा आत्मबल आ लगन मजगूत छलैक। जुत्ता मरम्मत करा ओ आदमी एक रुपैया पारिश्रमिक दऽ चलए लगल। मुदा माएक वि‍चार ओहिना ओइ बच्चाक हृदेमे जीबैत छल। बच्चा अपन उचित पाइ काटि बाकी घुमबए लगल। ओ महानुभाव, जूत्ता मरम्मत करौनिहार, सभ पाइ रखि लइले कहलक। तइपर बच्चा बाजल- “हमर जतबे उचित मजूरी हएत, ओतबे लेब। माए कहने छथि जे जतबे श्रम करी ओतबे मजूरी ली।”
बच्चाक बात सुनि ओ गुम्म भऽ, ओइ बच्चाकेँ उपरसँ निच्चाँ घरि नि‍ङहारए लगल। वएह बच्चा फ्रान्सक राष्ट्रपति दगाल भेलाह।

आत्मबल-२

जइ समैमे डॉक्टर राधाकृष्णन कओलेजमे पढ़ति रहथि, घटना ओइ समैक छी। कॉलेजमे पादरी शिक्षक अधिक।
एक दिन एकटा प्रोफेसर, क्लासेमे हिन्दू धर्मक निन्दा खुलायाम केलनि। बालक राधाकृष्णन सेहो क्लासमे रहथि। प्रोफेसरक बातसँ हुनका एते क्रोध भेलनि जे सम्हारि नै सकलाह। उठि कऽ ठाढ़ होइत पुछलखिन- “महाशय, की इसाई धर्म, आन धर्मक निन्दा केनाइ सिखबैत अछि?
राधाकृष्णनक प्रश्न सुनि ओ तमसा कऽ बाजला- “और की हिन्दुधर्म दोसराक प्रशंसा करैत अछि।”
राधाकृष्णन जबाब देलखिन- “हँ। हम्मर धर्म कोनो धर्मक अधलाह नै करैत अछि। गीतामे कृष्ण कहने छथिन- कोनो देवताकेँ उपासना केलासँ हमरे उपासना होइत अछि। आब अहीं कहू जे हम्मर धर्म ककर निन्दा करैत अछि।”
प्रोफेसर निरुत्तर भऽ गेलाह।

रचनाकार- जगदीश प्रसाद मण्‍डल

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Saturday, 3 September 2011

Maithili story of Gonu jha


गोनू झाक एक बेर माल – जालक हाट गेलाह तथा ओतs सं नीक बरद किनने अयलाह | पैसाक किल्लति रहिन तें एकटा किनलनि | सोचलनि जे पाइ होयत तं जोड़ा लगा लेब | एहि वर्ष ककरो संग भजैती कs लेब | यैह सभ सोचैत गोनू झा गाम दिस आबि रहल छलाह | कि तखने एक गोटे पुछलथिन-’गोनू बाबू... कतेकमे पटल? “
- ” पौन सयमे भेल| ‘ गोनू बाबू हुलसैत उत्तर देलथिन आ बात पर आगू बढ़ैत गेलाह | तखने एकटा जजमान सं भेट भs गेलनि | ओही वैह प्रशन कs देलथिन- ” पुरहित, कतेक पर टुटलै? “
-” यैह, पौन सयमे | ” गोनू झा उत्तर देलथिन |
एवम् क्रमे गोनू बाबूक गाम जेना – जेना लगीच भेल जानि, पुछनिहारक संख्यामे वृद्धि भेल जनि | गोनू बाबू पूर्वमे तs बड़ हुलसिकs उत्तर दैत जाइत छलथिन | मुदा बादमे क्रमशः एहि प्रशन पुछनिहार सभसं आजिज भs उठलाह | ककरा उत्तर देथु, ककरा नहि देथु | हुनकर बरद किनबाक जे ख़ुशी रहनि, से दुःख मे परिवर्तित होबs लगलनि |
मुदा गोनू बाबू अपनाकें एहिसँ असम्प्रक्त्त रखबाक प्रयास करs लगलाह | मुदा से हो तs कोना हो? यैह प्रशन बेर-बेर दिमागमे घुरिआय लगलनि | कि तखने एकटा बुद्धि फुरलनि | एम्हर एही चिन्तन-मंथनमे गाम सेहो आबि गेल रहनि | एकाएक ओ बरद्कें बाधक कातक एकटा गाछक सोइरमे देलनि आ अपन गाछक फुनगी पर जाकs बैसि रहलाह | नीक जकाँ जखन बैसि रहलाह सं ओहीठामसं चीकरब शुरू कयलनि- ‘ दौडै जाइ जाह हो लोक सभ……………मरलौं होsssss!! “
चिकरबाक ई अन्तहीन सिलसिला तखन ख़तम भेलनि जखन हुनका ई बुझा गेलनि जे गामक प्रायः सभ लोक जुमि गेलाह अछि |
गोनू झा गsरकें साफ़ करैत नीचाँ उतरय लगलाह | प्रशन पुछनिहारक संख्या बढ़ैत गेल – कि भेल ? किए चिकरै छलौं | कोना गाछ पर चढ़लौं आदि – आदि |
गोनू बाबू ताधरि मौन छलाह | नीचा आबि कने आस्वस्त भेलाह तथा सहटिकs बरद लग अयलाह | तदुपरांत ओ कनेक खखसलाह आ बाजि उठलाह – ” सुनि लियs! आब हम फेर नहि बाजब | हम उत्तर दैत – दैत थाकि गेल छी | तें सोचल जे समिलाते बजा, स्पष्ट कs देल जाय | हम एहिसँ बड़ व्यथित छी………|
- आखिर की बात छै गोनू बाबू?? ” सम्मिलित प्रशन छुटलनि |
- ” बात किछु नहि अछि” गोनू बाबू स्पष्ट करैत कहलथिन- ” हम इ बरद किनलहूँ अछि | एकर दाम अछि पोन सय | अदन्त अछि | बधिया अछि…….| “
गोनू बाबू कनी रुकलाह, फेर बजैत भेलाह- ” आब ऐ सं बेसी हमरा किछु नहि कहबाक अछि | तथा अहूँ सभसँ आग्रह जे फेर हमरा ऐ बरदक मादे किछु नहि टोकू, बस |
एतबा कहैत ओ बरद फोललनि आ निकसि गेलाह | उपस्थिति लोक सभक कंटमे आयल बात मूहँमे आबि अंटकि गेलनि |

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