Prakash thakur

I am prakash thakur, i am a student of 11th science,
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Saturday, 10 September 2011

Kavita - ak larki

                                                  
Ajj  ke  duniya  me larki ka jina kathin.
 Janma se lekar maran tak hai bandhan me bandhi.
Hai janamti jab ak larki maa ke garve se .
Chha jata hai adhiyara ghar aur samaj me.
Charo taraf gam ki mahol hi dikhta hai.
Na khushiya na chhathiyar manaya jata hai.
                                      Jina parta hai ise ghar ke tang Kothari me.
                                      Uske andar futate hai sapne ke fabbare.
                                      Duniya me rahte huye duniya se anjan rahte hai.
                                       Ghar ke dibaro ke andar jivan apana bitati hai.
Jab hoti hai larki 15 barsa ki.
Mata pita ko chinta hoti hai shadi ki.
Kyoki ak larki samaj ke liye hoti hai bhar.
Aur mata pita ke liye abhishap hoti hai.
                                            Samaj ke jalil khatarnak aur ghamandi purush.
                                             Ak larki ko jine nahi dete.
                                              Use atam hatya ke liye majbur karti hai.
                                              Larki ko purush upbhog ki bastu samajhte hai.
                                               Ise apne habash ka shikar bana kar.
                                                Ghut ghut kar jine ke liye majbur kar dete hai.
Dahej ki bhishan aag me agni pariksha dete hai.
Garibi rahne par jhullshak marte hai.
Shadi ke bad v samasya ki pahar tutati hai.
Pati ko bash me karna sas sasur ko khush rakhana.
Tunki nanad se nipatna bari kathin hoti hai.
Kasha k aurat, aurat ki dhukh ko samajhti.
Use v samaj me jine ka adhikar deti.
Apne man ki bato ko pura karne ka mauka deti.
                                                           Ae purush tum jago, samaj ki pahiya ko durust karo.
                                                            Iske sahso aur balidano ko tum kad karo.
                                                             Jiyo aur jine do, samaj ko aage badhao.
                                                                                                                         ABHILASH THAKUR (korthu)
tags - hindi kavita kavita

Sunday, 4 September 2011

Maithili kahani hindi baje ka shauk


एक बेर अरविन्द जी के शुद्ध हिंदी बाज के शौक चढलैन 
वो हमेशा शुद्ध हिंदी में बात करैत सभ सा
एक बेर वो पटना गेला वो बस स्टैंड पर रिक्शा वाला के आवाज देलखिन वो हो शुद्ध हिंदी में -
वो त्रिचक्रयान चालक वो त्रिचक्रयान चालक लेकिन कोनो रिक्शा वाला हिनका जका पढ़ल होई तब ने
कोई अई बे नै कैलई ता ई इशारा सा बजेलैथ एकटा रिक्शा वाला के आ कहलखिन क्या तुम सचिवाल...य चलोगे ???
वो रिक्शा वाला हिनकर बात बुझबे नै केलक वो ता खाली सेक्रटेरिएट बुझाई वो कहलक जे मालिक हमरा नाइ बुझल ऐछ की ई जगह कता छाई से??
अपने हमरा बतायल जाऊ हम आन्हा के ला चालब
आब अरविन्द जी रिक्शा पर बैस गेला आ वोकरा रास्ता बता ब लगला 
रास्ता में कनि उबड़ खाबड़ रहै ता रिक्शा कनि उछैल जाई जय सा अरविन्द जी के दिक्कत मेहसूस होइन
वो खिसिया क वोई रिक्शा वाला क कहलखिन वो त्रिचक्रयान चालक तुम अपने त्रिचक्रयान को शनैः शनैः पदस्थ करो
वोई रिक्शा वाला के बुझेलई जे ई ता हमरा गाईर दैत ऐछ वो कहलक जे मालिक हमरा गाईर किया दाईत छि???
आन्हा चुपचाप बैसल रहू आ खाली रास्ता बताबु नै ता हमहू गाईर देने शुरू क देब
आब अरविन्द जी बुझला जे ई ता हमर बेईज्ज़ती क देत वो चुप भ गेला
आ रिक्शा अपन रास्ता पर चला लागल किछ दूर गेला के बाद वोई रिक्शा वाला के रास्ता के खराबी के कारन बैलेंस बिगैर गेलई आ रिक्शा एकटा बिजली के खम्भा सा टकरा गेलई 
तै पर अरविन्द जी वोई रिक्शा वाला पर खिसिया क कही छथिन वो त्रिचक्रयान चालक तुमने अपने त्रिचक्रयान को बिद्युत के स्तम्भ से सामना करबा कर इस त्रिचक्रयान के एक चक्र को अक्र से वक्र करवा दिया अब में केसे जाऊंगा????? 
वो रिक्शा वाला के फेर बुझेलाई जे ई हमरा गइर दैत छैथ वो कहलकै मालिक हम आन्हा के आखिरी बेर कैह रहल छि जे हमरा गइर नै दिया नै ता बड़ ख़राब हैत आब चलू एकरा पाहिले ठीक कराबी छि तहान आगू ला जेब वो रिक्शा वाला एकटा साइकिल के मिस्त्री के पास लागेल लेकिन रिक्शा वाला के किछ कहा सा पाहिले अरविन्द जी वोई मिस्त्री के कहै छथिन अपना हिंदी में से देखियौ आन्हा सब
हे द्विचक्रयान अभियंता इस त्रिचक्रयान के चालक ने इस त्रिचक्रयान को बिद्युत के स्तम्भ से सामना करवाकर इसके अगले चक्र को अक्र से वक्र कर दिया ह कृप्या इसे सुचक्र कर दे...
वो मिस्त्री बुझलक जे हमरा ता इ गैर द रहल ऐछ आ रिक्शा वाला ता पहिलेहे हिनका कैह देने रही जे आब निक नै हैत जौं आन्हा हमरा आब गैर देब ता 
आब वो दुनु गोटे आव देखलक नै ताव देलक हिनका माईर पीट क दिन में तरेगन सुझाई 
आब बेचारा अरविन्द जी अपन काबिलियत पर कनैत कनैत वापस घर एला.....
आ क़सम खेला जे आब आई के बाद शुद्ध हिंदी नै बाज़ब आ हिनका माथ सा इ शुद्ध हिंदी बाज के भूत उतैर गेलैन
tags - maithili kahani , kahani,

Maithili kahani


आत्मबल- १

फ्रान्सक कथा थिक। रास्ता बगलक पहाड़ीपर बैस एक गोटे अपन जुत्ता मरम्मत करबैत रहथि। एकटा ढेरबा बच्चा जुत्ता मरम्मत करै छल। ओइ बच्चाक बगए-बानिसँ गरीबी झलकैत रहए। मुदा आत्मबल आ लगन मजगूत छलैक। जुत्ता मरम्मत करा ओ आदमी एक रुपैया पारिश्रमिक दऽ चलए लगल। मुदा माएक वि‍चार ओहिना ओइ बच्चाक हृदेमे जीबैत छल। बच्चा अपन उचित पाइ काटि बाकी घुमबए लगल। ओ महानुभाव, जूत्ता मरम्मत करौनिहार, सभ पाइ रखि लइले कहलक। तइपर बच्चा बाजल- “हमर जतबे उचित मजूरी हएत, ओतबे लेब। माए कहने छथि जे जतबे श्रम करी ओतबे मजूरी ली।”
बच्चाक बात सुनि ओ गुम्म भऽ, ओइ बच्चाकेँ उपरसँ निच्चाँ घरि नि‍ङहारए लगल। वएह बच्चा फ्रान्सक राष्ट्रपति दगाल भेलाह।

आत्मबल-२

जइ समैमे डॉक्टर राधाकृष्णन कओलेजमे पढ़ति रहथि, घटना ओइ समैक छी। कॉलेजमे पादरी शिक्षक अधिक।
एक दिन एकटा प्रोफेसर, क्लासेमे हिन्दू धर्मक निन्दा खुलायाम केलनि। बालक राधाकृष्णन सेहो क्लासमे रहथि। प्रोफेसरक बातसँ हुनका एते क्रोध भेलनि जे सम्हारि नै सकलाह। उठि कऽ ठाढ़ होइत पुछलखिन- “महाशय, की इसाई धर्म, आन धर्मक निन्दा केनाइ सिखबैत अछि?
राधाकृष्णनक प्रश्न सुनि ओ तमसा कऽ बाजला- “और की हिन्दुधर्म दोसराक प्रशंसा करैत अछि।”
राधाकृष्णन जबाब देलखिन- “हँ। हम्मर धर्म कोनो धर्मक अधलाह नै करैत अछि। गीतामे कृष्ण कहने छथिन- कोनो देवताकेँ उपासना केलासँ हमरे उपासना होइत अछि। आब अहीं कहू जे हम्मर धर्म ककर निन्दा करैत अछि।”
प्रोफेसर निरुत्तर भऽ गेलाह।

रचनाकार- जगदीश प्रसाद मण्‍डल

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Saturday, 3 September 2011

Maithili chutkula

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रानू जी :- एक बेर रानू जी बैंक लोन ल के कार लोन लेलैथ'
कोनो कारन बस उ लोन नै चूका पेलखिन त बैंक वला हिनक कार उठा
के ल के चैल गेल..............
रानू जी :- रानू भाई सोचलैथ पहिले पता रहीत त ब्याह सेहो लोन ल के
कैर्तोऊ.........................हहह्ह्ह्हह्ह्ह्ह


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Maithili chutkula

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चित्रन्शु जी जहन ४ साल के छेला तहान पप्पा से कहलखिन ....

पप्पा पप्पा हम आये सपना देख्लाव जे हमर एक टा पैर ज़मीन पर आ एकटा पैर चाँद पर छल !

पप्पा कहलखिन :::: बउवा चित्रान्शु एहेन सपना नै देखू ! नै त रूपा के जांघिया फैट जायत ! लग पास के सपना देखू


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Maithili chutkula

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एक बेर हमरा बोखार लागि गेल। अस्पतालमे भरती छलहुँ। कएटा मित्र (कुमित्र) जिज्ञासामे अएलाह। पुछलाह की हाल ? हम कहलिअन्हि बोखार तँ टूटि गेल मुदा देह-हाथक दर्द नहि टूटल। मित्र जबाब देलाह कोनो गप्प नहि जहिना भगवान अहाँक बोखार तोड़लन्हि तेनाहिते देहो-हाथ तोड़बा देताह।

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Maithili chutkula


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एक बेरक बात एच्छ चित्रान्शु बाबु एकता डॉक्टरक क्लिनिन्क सामने डेली ठaहर भ जयेत छल
लडिएस डॉक्टर:- अहाँ रोज़ सुबह के क्लिनिक के बाहार औरत के किया घुईर घुईर के देखैत छि

चित्रान्शु बाबु:- जी अही ने बाहर लिखने छि, औरत के देखैक समय ९ बजे से ११ बजे..............
 
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Maithili chutkula

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मुकेश जी :- सर, हमर कनिया हरा गेलखिन हन...
पोस्टमास्टर:- भाई इ पोस्ट ऑफिस एच्छ, जा के पुलिस स्टेशन में कम्प्लैन लिखावु
मुकेश जी :- की करू ...., ख़ुशी के मारे किछु हमरा समैझ नै आबैत एच्छ

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Maithili kavita


Lagal rahu lagal rahu jinka biyah bhay gel bhagal rahu
nai t kaniyan marti dang chhutbo nai karat pran
afat me rahat jaan
bachcha budruk paai paai a paai lel karat pranam
babu me kahti e chhathi hamar kalam lekin ehan kaaj je karait rahab t het sabta dharam khub khau chura dahi tahi par longiya mirchay jan ki nai bhetay t bhukhe pet me surku chay
bakri bali ke bakri herelai
chorba kekkai naas gadha bala khub amelay barsat ke elai mans
lagal rahu lagal rahu
chor nukayal kharbonhi me bhetlai ek ta mush dekhte muske gham chuelak bhay kel ulta sup siyabar ram chandra ki jai


Tags - Maithili Kavita , Maithili Rachana

Maithili story of Gonu jha


गोनू झाक एक बेर माल – जालक हाट गेलाह तथा ओतs सं नीक बरद किनने अयलाह | पैसाक किल्लति रहिन तें एकटा किनलनि | सोचलनि जे पाइ होयत तं जोड़ा लगा लेब | एहि वर्ष ककरो संग भजैती कs लेब | यैह सभ सोचैत गोनू झा गाम दिस आबि रहल छलाह | कि तखने एक गोटे पुछलथिन-’गोनू बाबू... कतेकमे पटल? “
- ” पौन सयमे भेल| ‘ गोनू बाबू हुलसैत उत्तर देलथिन आ बात पर आगू बढ़ैत गेलाह | तखने एकटा जजमान सं भेट भs गेलनि | ओही वैह प्रशन कs देलथिन- ” पुरहित, कतेक पर टुटलै? “
-” यैह, पौन सयमे | ” गोनू झा उत्तर देलथिन |
एवम् क्रमे गोनू बाबूक गाम जेना – जेना लगीच भेल जानि, पुछनिहारक संख्यामे वृद्धि भेल जनि | गोनू बाबू पूर्वमे तs बड़ हुलसिकs उत्तर दैत जाइत छलथिन | मुदा बादमे क्रमशः एहि प्रशन पुछनिहार सभसं आजिज भs उठलाह | ककरा उत्तर देथु, ककरा नहि देथु | हुनकर बरद किनबाक जे ख़ुशी रहनि, से दुःख मे परिवर्तित होबs लगलनि |
मुदा गोनू बाबू अपनाकें एहिसँ असम्प्रक्त्त रखबाक प्रयास करs लगलाह | मुदा से हो तs कोना हो? यैह प्रशन बेर-बेर दिमागमे घुरिआय लगलनि | कि तखने एकटा बुद्धि फुरलनि | एम्हर एही चिन्तन-मंथनमे गाम सेहो आबि गेल रहनि | एकाएक ओ बरद्कें बाधक कातक एकटा गाछक सोइरमे देलनि आ अपन गाछक फुनगी पर जाकs बैसि रहलाह | नीक जकाँ जखन बैसि रहलाह सं ओहीठामसं चीकरब शुरू कयलनि- ‘ दौडै जाइ जाह हो लोक सभ……………मरलौं होsssss!! “
चिकरबाक ई अन्तहीन सिलसिला तखन ख़तम भेलनि जखन हुनका ई बुझा गेलनि जे गामक प्रायः सभ लोक जुमि गेलाह अछि |
गोनू झा गsरकें साफ़ करैत नीचाँ उतरय लगलाह | प्रशन पुछनिहारक संख्या बढ़ैत गेल – कि भेल ? किए चिकरै छलौं | कोना गाछ पर चढ़लौं आदि – आदि |
गोनू बाबू ताधरि मौन छलाह | नीचा आबि कने आस्वस्त भेलाह तथा सहटिकs बरद लग अयलाह | तदुपरांत ओ कनेक खखसलाह आ बाजि उठलाह – ” सुनि लियs! आब हम फेर नहि बाजब | हम उत्तर दैत – दैत थाकि गेल छी | तें सोचल जे समिलाते बजा, स्पष्ट कs देल जाय | हम एहिसँ बड़ व्यथित छी………|
- आखिर की बात छै गोनू बाबू?? ” सम्मिलित प्रशन छुटलनि |
- ” बात किछु नहि अछि” गोनू बाबू स्पष्ट करैत कहलथिन- ” हम इ बरद किनलहूँ अछि | एकर दाम अछि पोन सय | अदन्त अछि | बधिया अछि…….| “
गोनू बाबू कनी रुकलाह, फेर बजैत भेलाह- ” आब ऐ सं बेसी हमरा किछु नहि कहबाक अछि | तथा अहूँ सभसँ आग्रह जे फेर हमरा ऐ बरदक मादे किछु नहि टोकू, बस |
एतबा कहैत ओ बरद फोललनि आ निकसि गेलाह | उपस्थिति लोक सभक कंटमे आयल बात मूहँमे आबि अंटकि गेलनि |

tags - Kahani , Gonu jha , Story of gonujha

Mithila hamar shan


पावनी त्यौहार आपन मिथिला के
आनलक जीवन में रंग प्रखर
एतेक सुन्दर इतिहास मिथिला के
किये नै रहत मिथिला शान हमर

माँ जानकी जतो जन्म लेलेथ
भगवान् राम के भेलेंह प्रेम निशाब्र
शिव के धनुष टुटल मिथिला में
किये नै रहत मिथिला शान हमर

tags - Maithili Maithili kavita Maithil

Maithili ka vikas




मिथिला आ मैथिली भाषाक विकास हवाई सर्वेक्षण सं संभव नहि छैक |मैथिली भाषा संवैधानिक अधिकार त पाबि गेल मुदा मिथिलाक सर्वांगिन विकास त’ एखन कोसो दुर अछि |मैथिलीक संवैधानिक अधिकार भेटने काजक इतिश्री नहि भ’ गेलैक |इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया ,प्रिंट मीडिया आ अन्य संबाद श्रोत सं मैथिलीक लेल मात्र ढोल पिटल जाइत अछि |कतेक गगन विहारी नेता वोट क्लव पर दिल्ली मे जाकय ओहीठाम दसटा मैथिल क’ पकरि इन्क्लाव –ज़िंदा वाद ,आ ५-१० टा मांगक नारा दय अखवार आ टी०वी० मे अपन वक्तव्य दय मिथिलाक विकासक सहयोगी भ’ जायत छथि |यद्यपि अगर ओ गगन विहारी नेता ओतबो नहि करताह त’ मैथिली क’ नामो लेवा वाला ताकने नहि भेटतइक ,एहि लेल ओ जरुर धन्यबादक पात्र छथि |एखन तक त’ यैह देखलियइ अछि |लेखक –कथाकार अपन काज बाखुबी निमाहि रहल छथि |मैथिली भाषाक खजाना दिन दिन भरि रहल छैक ताहि मे कोनो संदेह नहि |

मिथिलाक विकासक लेल ओकरा जमीनी लीडरसिप चाही |एहन एहन ग्रुप बनय जे ग्रुप मिथिलाक सुदूर देहात मे घुमि लोक सभ क’ जागृत करय , जे ओकर भाषा, मात्र मैथिली छैक |ओ जे बजैत अछि सैह मैथिली छैक | मैथिलीक संग कतेक षड़यंत्र भ’ रहल छैक |कनेक टेढ़ बाजू त’ मैथिली ,बज्जिका ,अंगिका मुंगेरिया आ आर कतेक भाषा मे परिणत भ’ जायत छैक |मुदा से गलत छैक |कोनो भाषा शुद्ध सभठाम नहि बाजल जायत छैक |जे हिंदी इलहाबादक छैक से कतौ दोसर ठामक छैक की ? जतेक प्रान्त ओतेक तरहक हिंदी | बनारस ,पटना ,कोलकोता ,भोपाल ,चंडीगढ़ ,दिल्ली आ दक्षिण भारत कतौक हिंदी मानक नहि मुदा ओ सभ हिंदी छैक | हर भाषा मे वैह बात छैक मुदा मैथिली संग सौतेला जका व्यबहार |एकर मूल कारण जे ग्रासरूट पर हम सभ मैथिल के एखन तक जागृत नहि कयल |

हमरा फिल्ड मे काज करबाक मौक़ा भेटैत रहैत छल |सहरसा ,पुरनिया आ कटिहार जिलाक सुदूर देहात मे जाइत छलौ त’ देखियैक मैथिली छोरि कोनो भाषा केकरो नहि बाजल होयक | पुछला पर उत्तर भेटय जे “हमरा सभक मातृभाषा हिंदी अछि “ |ईहो बात मैथिली मे बजैत छल | एकबेर सहरसा जिलाक एकटा कालेज टीचर सं गप्पक काल कहलनि जे हुनकर मातृभाषा हिंदी छनि |हम पुछलियइन ,जे अहाँक घर सुपौल लग अछि |अहाँक माँ –बाबूजी जाहि भाषा मे अहाँ सं गप्प करैत छथि ओ कोन भाषा छैक? बेचारे चुप भ’ गेलाह | कहक मतलब ओ भाषाक प्रति जागरूक नहि छथि |हम हायरसेकेंड्री मे पढैत रही |हमर एकटा मित्र छलाह श्री राम परीक्षण यादव |बोर्ड क’ परीक्षा जखन ६ मास रहलैक तखन ओ एक दिन हमरा कहलनि ,दोस्त –हमरा त’ सभ सं बेसी डर हिंदी सं होयत अछि |हम कहलियैन जे मैथिली राखि लिअ |ओ कहलनि मैथिली त’ आओर भारी छैक |हम कहलियैन अपन मातृभाषा अछि ,जल्दिये सीख लेब | हुनका हम मददि करय लगलियनि |रिजल्ट बहार भेलैक |स्कुल मे सभ सं बेसी अंक रहनि |आइ हमर ओ मित्र संयुक्त सचिव भ’ रिटायर क’गेलाह आ पूर्ण मैथिल छथि |

१- मिथिला आ मैथिलीक विकासक लेल ग्रासरूट पर मैथिल क’ जागृत केनाइ २-प्राथमिक कक्षा सं मैथिली मे अनिवार्य शिक्षा | ३ –जे बहुत अल्ट्रा माडर्न छथि ओ कम सं कम अपना घर में अपना परिवार सं मैथिली मे गप्प करथि |हम त’ कतेक क’ देखलियइन अछि जे पत्नी सं हिंदी मे बात करैत |ओकर प्रभाव त’ बाल- बच्चाक संस्कार पर परतैक |ओ बच्चा अपन भाषा क’ बिसरि जेतैक |जत’ क’ मैथिली जेहन छैक ओहने क’ व्यवहार करू |ओ परफेक्ट मैथिली छैक |एकटा बात स्मरण आबि रहल अछि |हम बरस ७०-७१ मे मोती लाल रीजिनल इंजिनियरिंग कालेज मे पढैत रही |अखिल भारतीय मैथिली साहित्य समितिक अध्यक्ष स्व० डा० श्री जय कान्त मिश्र छलाह आ हम सचिव रही ||हम सभ मैथिलीक कार्यक्रम समय समय पर करैत रहैत छलौ |विद्यापति पर्व मनेबाक कार्यक्रम बनलैक |स्वागताध्यक्ष केकरा बनायल जाय ?|हम कहलियैन हमरा कालेज मे डॉ०एस ० एन० सिन्हा ,एच ० ओ० डी० छथि ,हुनका बनायल जाय |प्रस्ताव पारित भेल |हम सभ डॉ० सिन्हा लग गेलौ |ओ कहलनि डॉ० राम कुमार वर्मा उदघाटन करताह आ हमरा मैथिली बाजल नहि होयत अछि |डॉ० मिश्र कहलखिन ,सिन्हाजी ,अहाँक घर सीतामढ़ी थीक ,मैथिलीक जन्म स्थली |अहाँ अपना घर मे जे बजैत छि सैह मैथिली थीक ||ओ बात मानि गेलाह मुदा हुनका डर होयत रह्लनि कारण एहि कार्यक्रम मे इलहाबादक तथा बिहारक पैघ हस्ती सभ भाग लइत छलाह |डॉ० सिन्हा ३-४ लाइन शुद्ध मैथिली में लिखाकय घोखि गेलाह |हम सभ जाइ त’ बे- रोकटोक सूना देथि | जखन कार्यक्रम प्रारम्भ भेलैक त’ ओ एक लाइन बाजि चुप भ’ गेलाह |१-२ मिनट चुप रहलाह |हुनका डॉ० मिश्रक बात याद परलनि |आ धारा प्रवाह अपन घर आंगनक मैथिली भाषा मे लगभग आधा घंटा तक बजलाह |पूरा हाँल ताली सं गुंजायमान भ’ गेल |तैं पूर्वी चम्पारण सं महानंदाक तट आ नेपालक तराई सं गंगाक तटक बीच मे जे भाषा बाजल जायत छैक ओ शुद्ध मैथिली छैक | प्राथमिक कक्षा सं अनिवार्य मैथिली भाषा मे पढाई भेला सं सबटा गैप स्वतः समाप्त भ’ जेतैक |मैथिली जागरणक लेल नवतुरिया सभ जिला स्तर पर ग्रुप बनाऊ |मानैत छी समय क’ अभाव अछि मुदा एही मे सं समय निकलय परत | ग्रुप बनैक त’ हमरो नाम द’ सकैत छी |

हे नवतुरिया जागू
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